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रागायन की संगीत सभा : सर्द मौसम में खिली सुरों की गुनगुनी धूप

ग्वालियर। शहर की प्रतिष्ठित सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा में आज सुरों ने ऐसी अठखेलियाँ की कि सर्दी का अहसास जाता रहा। सुरों की गुनगुनी धूप में नहाकर रसिक मुग्ध हो उठे। इस सभा में जवां साल सजग माथुर से लेकर डॉ वीणा जोशी और बदायूं से तशरीफ़ लाए मुज्तबा हसन ने सुर साज़ की इस महफ़िल में खूब रंग बिखेरे। लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला में आयोजित इस संगीत सभा का शुभारंभ रागायन के अध्यक्ष एवं शाला के महंत पूरण वैराठी पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवकदास जी महाराज ने माँ सरस्वती एवं गुरु पूजन कर किया। इस अवसर पर रागायन के सचिव पंडित रामबाबू कटारे, ग्वालियर के वरिष्ठ संगीत साधक पंडित श्रीराम उमडेकर, प्रख्यात चित्रकार प्रो कुमकुम माथुर,मनीष शर्मा उपस्थित थे। सभा का आगाज़ नवोदित कलाकार सजग माथु you र के एकल तबला वादन से हुआ। ग्वालियर के वरिष्ठ तबला वादक डॉ मुकेश सक्सेना के शिष्य सजग ने तीन ताल में अपना वादन पेश किया। उन्होंने पेशकार से शुरू करके इस ताल में कुछ कायदे, रेले गतें और टुकड़े पेश किए। सजग का वादन साफ सुथरा, और तैयारी भरा था। उनके साथ सारंगी पर जनाब अली अहमद ने लहरा दिया। सभा की अगली प्रस्तुति में ग्वालियर घराने की जानी मानी गायिका डॉ वीणा जोशी का खयाल गायन हुआ। वीणा जी ने अपने गायन के लिए समयानुकूल राग मधमाद सारंग का चयन किया। इस राग में उन्होंने दो बन्दिशें पेश की। एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे- " सुन लो मोरी श्याम" जबकि तीनताल में मध्यलय की बंदिश के बोल थे- " ऐसो नटखट है छैल नंद" । इन दोनों ही बन्दिशों को वीणा जी ने बड़े ही कौशल से गाया। विलंबित बंदिश को गाने में राग की बढ़त करते समय एक एक सुर खिलता चला गया। तानों की अदायगी भी बेहतरीन रही। खासकर आकार की तानें आप बड़ी ही सफाई से पेश करती हैं।आपने गायन का समापन भजन - बाजे मुरलिया बाजे से किया। आपके साथ हारमोनियम पर पंडित महेशदत्त पांडे और तबले पर डॉ विनय विन्दे ने संगत की। सभा का समापन सितार और सारंगी की जुगलबंदी से हुआ। सितार पर थे बदायूँ से तशरीफ़ लाए रामपुर सहसवान घराने के जनाब मुज्तबा हसन, जबकि सारंगी पर जनाब मोहम्मद अहमद थे। दोनों ने अपने वादन के लिए राग मधुवंती का चयन किया। संक्षिप्त आलाप के साथ आपने इस राग में तीन गतें पेश की। विलंबित गत रूपक में निबद्ध थी जबकि मध्य एवं द्रुत लय की गतें तीन ताल में निबद्ध थी। आपके वादन में रागदारी की बारीकियों के साथ गायकी और तंत्रकारी दोनों अंगों का संतुलन देखने को मिलता है। आपके वादन में माधुर्य प्रचुरता में है, जो रसिकों को लुभाता है। आपने दादरा की धुन से वादन का समापन किया। आपके साथ तबले पर डॉ मुकेश सक्सेना ने पूरी ऊर्जा के साथ संगत की। शुरू में रागायन के अध्यक्ष पंडित रामबाबू कटारे ने स्वागत भाषण दिया और संस्था के उद्देश्य व गतिविधियों पर प्रकाश डाला। शाला के महंत स्वामी रामसेवकदास जी ने अतिथि कलाकारों का शॉल श्रीफल से स्वागत किया। इस अवसर पर ग्वालियर के संगीत साधक संगीत रसिक, उपस्थित थे।