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सेंट्रल जेल में कैदी करेंगे अब गीता का पाठ, एडीजीपी की अनोखी पहल, देखें क्या कह रहे हैं एडीजीपी राजाबाबू सिंह

ग्वालियर। मंदिरों में सुबह-शाम शंखनाद के साथ गीता के श्लोकों का उच्चारण सुनना आम बात है। लेकिन गीता पाठ की गूंज यदि जेल में हर रोज सुनाई दे और ये बात कोई कहे या हमको अचानक से सुनने को मिले तो यह अटपटा जरूर लगेगा। परन्तु अब ग्वालियर की सेंट्रल जेल में कैंदियों के श्रीमुख से गीता के श्लोक सुनाई देगें। मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजीपी राजाबाबू सिंह ने आज जेल में बंद 700 कैदियों को श्रीमद् भागवत गीता बांटी। राजाबाबू सिंह का कहना है कि दशहरा बुराई को खत्म करने का त्यौहार है इसलिए उन्होनें कैदियों को गीता दीं हैं।
ग्वालियर की सेंट्रल जेल में आज ऐसा अध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद ही कोई करेगा। खूंखार अपराधी और नामचीन कैदियों के हाथ में श्रीमद भागवत गीता। पता चला है कि जेल में अब भक्ति की बयार बहने जा रही है। जिसकी आधारशीला ग्वालियर रेंज के आईजी और एडीजीपी राजाबाबू सिंह ने रखी है। राजाबाबू सिंह ने कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम शुरू की है। जिसके लिए उन्होनें विजयदश्मी यानि की दशहरें का दिन चुना। उन्होनें जेल में बंद सभी कैदियों को श्रीमद् भागवत गीता बांटी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अनोखी मुहिम शुरू की गई है। कैदियों को अध्यात्म एवं धर्म के सहारे जोड़ने के लिए हर रोज दो घंटे गीता का पाठ कराया जाएगा। जेल में हर रोज कैदियों को गीता के 18 श्लोक सुनाए जाएंगे। इसके बाद कैदी इन श्लोकों का स्वयं पाठ करेगें। माना जा रहा है गीता श्लोकों का पाठ करने से कैदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना आसान होगा। खास बात ये है कि जेल में मुस्लिम कैदियों ने भी हिन्दू धर्म शास्त्र गीता को लिया। ऐसे ही एक कैदी अकील खान का कहना है वो गीता के जरिए अपने जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करेगें। कैदी ब्रजनंदन सिंह यादव का कहना है  ये एक अच्छा पल है, जब जेल में श्रीमद् भागवत गीता पढ़ने को मिल रही है।
बहरहाल, तय कार्यक्रम के मुताबिक ग्वालियर की सेंट्रल जेल के कैदी सुबह चार बजे से श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक यानि भक्ति रस में डुबकी लगाने को तैयार हो जाएंगे। प्रतिदिन कैदी 2 घंटे गीता के श्लोकों का पाठ करेगें। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि सेंट्रल जेल में बंद कैदियों की जिंदगी मे कितना बदलाव आता है। बहरहाल एडीजीपी जैसे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जा रहा प्रयास निसंदेह सराहनीय है क्योंकि इसके नुकसान शून्य हैं फायदे भविष्य की गर्त में छिपे हैं।
- रविन्द्र प्रताप सिंह कुशवाह