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कमाल की तत्पर पुलिस, वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली की कलम से

ग्वालियर। जिले के डबरा में कार्यरत तीन पत्रकारों के खिलाफ पुलिस ने ब्लैकमेलिंग का मुकद्दमा दर्ज कर लिया। दरअसल एक पत्रकार राजावत को एक आरा मशीन पर हरे पेड़ कटने की सूचना मिली थी।  सूचना सही थी तो उसने इसकी जानकारी वन विभाग के अफसरों को दी। वे वहां पहुंच गए तो व्यापारी पत्रकार को धमकाने लगा। मुकद्दमे लगवाने की धमकी देने लगा। उसने एक नेता को फोन लगाया और एक एप्लिकेशन भेजी और पैसे मांगने का केस दर्ज कर लिया। न गबाह । न सबूत। स्कॉटलैंड पुलिस से भी ज्यादा तत्परता पुलिस ने दिखाई। स्वयं केस दर्ज करने वाले पुलिस साहिबान ने माना उंन्होने कोई जांच नही की। फरियादी ने कोई सबूत नही दिया। अगर कोई ब्लैकमेलिंग करता है तो उसे सजा होनी चाहिए लेकिन यह शब्द पत्रकारों के खिलाफ हथियार नही बनना चाहिए अन्यथा ग्रामीण क्षेत्रो में कार्यरत पत्रकारों का काम कर पाना मुशिकल हो जाएगा। अगर पुलिस के पास पैसे मांगने की कोई ऑडियो वीडियो है तो उसे सार्वजनिक करें ताकि पत्रकार इस मामले से अपने को अलग कर सकें। क्योंकि पुलिस इस बहाने सभी पत्रकारों को अपमानवोध कराती है। 
दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि बगैर जांच और सबूत के पत्रकारों पर कार्यवाही वहां की पुलिस ने की जो गृहमंत्री का गृह नगर है और वो भी ऐसे, जो जनसम्पर्क मंत्री रह चुके है और उनके प्रयासों से ही आदेश जारी हुआ था कि पत्रकार के खिलाफ बगैर जांच के आपराधिक प्रकरण दर्ज न किया जाए और जांच भी राजपत्रित अधिकारी करे। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए अगर पत्रकार दोषी हो तो उन पर यथोचित कार्यवाही हो और दोषी न हो तो मामला खत्म कर दोषी फरियादी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। (साभार-वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली की एफबी बॉल से)



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