रागायन की सभा में सुरों से हनुमान जी की आराधना
ग्वालियर। शहर की प्रतिष्ठित सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा मे आज सुरों से हनुमानजी की आराधना की गई। सुरसाज की इस महफ़िल में नवोदित से लेकर वरिष्ठ संगीत साधकों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।
रागायन के अध्यक्ष एवं गंगादास जी की बड़ी शाला के महंत स्वामी रामसेवकदास जी महाराज के सानिध्य में माँ सरस्वती एवं गुरु पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रागायन के सचिव पंडित रामबाबू कटारे, ब्रह्मदत्त दुबे,महेशदत्त पांडेय डॉ मुकेश सक्सेना, उपस्थित थे।
सभा का शुभारंभ मुरैना से तशरीफ़ लाई सुश्री प्रियंका शर्मा के गायन से हुआ। प्रियंका जी ने राग शुद्ध कल्याण से गायन की शुरुआत की। इस राग में उन्होंने दो बन्दिशें पेश की। एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे- " बोलन लागे पपीहा" जबकि तीनताल में द्रुत बंदिश के बोल थे-" बाजो रे बाजो मंडलरा" । दोनों ही बन्दिशों को प्रियंका जी ने पूरे कौशल से गाया। प्रियंका जी की आवाज में मधुरता तो है ही वह तीनों सप्तकों में घूमती है। गायन का समापन आपने भजन -" जानकी नाथ सहाय करें" से किया। आपके साथ तबले पर अविनाश महाजनी एवं हारमोनियम पर संजय देवले ने संगत की।
सभा की दूसरी प्रस्तुति में सुपरिचित तबला वादक डॉ अरुण धर्माधिकारी जी का एकल तबला वादन हुआ। उन्होंने दिल्ली अजराड़ा घराने की परंपरा के अनुसार तीनताल में वादन पेश किया।उन्होंने पेशकार, कायदे टुकड़े, चक्करदार के साथ कुछ गतें और परनें पेश की। आपके साथ सारंगी पर मजीद खान ने संगत की।
सभा का समापन झांसी से पधारे श्री समीर भालेराव के ख़याल गायन से हुआ। समीर जी ने अपने गायन की शुरुआत राग विहाग से की। उन्होंने इस राग में दो बन्दिशें पेश की। एकताल में विलंबित बंदिश के बोल थे- " कैसे सुख सोवे" जबकि तीनताल में द्रुत बंदिश के बोल थे- लगन तोसे लागी। " दोनों बन्दिशों को आपने पूरे मनोयोग से गाया। राग की बढ़त करने में सुर खिलते चले गए। फिर तानों की प्रस्तुति भी अच्छी रही। समीर जी की आवाज भी बुलंद और खुली है। वे तीनों सप्तकों में सहजता से गाते हैं। गायन का समापन उन्होंने ठुमरी - " दीवाना किये श्याम " से किया और ठुमरी गायकी के विविध रंगों को पेश किया। आपके साथ हारमोनियम पर पंडित महेशदत्त पांडेय और तबले पर डॉ विनय विन्दे ने संगत की। अंत में रागायन के सचिव पंडित रामबाबू कटारे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
