चौहान, तोमर और सिंधिया के खिलाफ़ याचिका खारिज, अब जनहित याचिका के रूप में कोविड-19 गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पेश किया जाएगा
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तलेगांवकर, ग्वालियर। हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर प्रस्तुत याचिका को जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता के साथ खारिज कर दिया। कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने एडवोकेट संजय शुक्ला के माध्यम से यह कहते हुए याचिका प्रस्तुत की कि केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई है उसका ग्वालियर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा की उपस्थिति में उल्लंघन किया गया। याचिका में कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान को लेकर फूलबाग मैदान पर एवं ग्वालियर व्यापार मेला के फैसिलिटेशन सेंटर में 22, 23, एवं 24 अगस्त को प्रशासन की अनुमति के बिना भीड़ जुटाई गई। इसे रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाए। इसके लिए जिम्मेदार मुख्यमंत्री सहित भाजपा के अन्य नेताओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए। याचिका में कहा गया कि गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर जिला प्रशासन द्वारा आमजन के खिलाफ कार्यवाही की जाती है। जबकि शहर में 3 दिन तक नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। इस मामले की सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि न्यायालय ने ऐसे मामले में पूर्व में दिशा निर्देश जारी किए हैं इसलिए इसे खारिज किया जाए। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कहा कि वैसे जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत करें, इस पर याचिकाकर्ता द्वारा याचिका वापस लिए जाने पर न्यायालय में याचिका को जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत किए जाने की स्वतंत्रता के साथ खारिज़ कर दिया।
