NSUI के पांच नेताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज किये जाने का मामला, कुलपति पर झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाने का लगाया आरोप, एसपी को ज्ञापन सौंपकर की जांच की मांग
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय की कैंटीन में बीती रात तोड़फोड़ कर दी गई। साथ ही आरोपियों ने दलित कर्मचारियों के साथ गाली-गलौच करते हुए अभद्रता की। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को नामजद किया है जो एनएसयूआई नेता बताये गए हैं। वहीं पुलिस कार्यवाही के विरोध में आज एनएसयूआई ने एसपी आफिस में प्रदर्शन किया। एनएसयूआई ने कुलपति पर आरोप लगाते हुए सीबीआई चीफ के प्रभाव का इस्तेमाल किये जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है क्योकि सीबीआई चीफ कुलपति के भाई हैं और मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।गौरतलब है कि मंगलवार रात कुछ लोगों ने जीवाजी यूनिवर्सिटी की कैंटीन में उत्पात मचाया, तोड़फोड़ की और कैंटीन के कर्मचारी से अभद्रता करने की पुलिस को शिकायत मिली। इसके बाद कैंटीन के एक कर्मचारी ने जातिसूचक गालियां देने व कैंटीन में तोड़फोड़ किये जाने की पांच युवकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने इस मामले में कैंटीन कर्मचारी कृष्ण झा पुत्र संतोष झा उम्र 19 साल निवासी कटीघाटी की शिकायत पर सचिन द्विवेदी, गोलू परमार, पवन शर्मा, राघव कौशल और विशाल भदौरिया के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इस मामले में नामजद पांचों आरोपी एनएसयूआई नेता हैं। लिहाजा एनएसयूआई ने आज एसपी आफिस पर प्रदर्शन किया और एसपी नवनीत भसीन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन की अगुवाई एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव सचिन द्विवेदी खुद ही कर रहे थे। सचिन का कहना है कि कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने अपने भाई सीबीआई चीफ के प्रभाव में ये कार्यवाही कराई है। सचिन ने एसपी से मांग की कि घटनास्थल के सीसीटीव्ही फुटेज चेक किये जायें, सच्चाई सामने आ जायेगी। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की कैंटीन के खाने में कीड़े निकल रहे थे। इसके खिलाफ एनएसयूआई पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रही थी। जिसके बाद कुलपति ने उनका आंदोलन दबाने के लिए उन सहित पांच एनएसयूआई नेताओं के खिलाफ दलित कर्मचारी की सहायता से प्रकरण दर्ज कराया है, जो की अनुचित है। ज्ञापन लेने के बाद एसपी नवनीत भसीन ने प्रदर्शनकारी एनएसयूआई नेताओं को भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच सीएसपी मुरार से कराई जाएगी, इसके बाद कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल आरोपी एनएसयूआई नेताओं पर कार्यवाही टल गई है। किंतु इस मामले से एक सवाल जरूर खड़ा हो गया है अगर कैंटीन में या उसके आस-पास सीसीटीव्ही कैमरे लगे हैं तो पुलिस ने बिना उनके फुटेज देखे प्रकरण पंजीबद्ध कैसे कर दिया ? जबकि एनएसयूआई यूनिवर्सिटी में आंदोलनरत भी थी।
