सेंट्रल जेल में बंदी भाइयों को तिलक करने पहुचीं कई बहनें हुई निराश
ग्वालियर। सेंट्रल जेल ग्वालियर में शुक्रवार को होली की भाई दूज के मौके पर महिलाओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुरक्षा के लिहाज से जेल प्रशासन ने इस बार खान-पान सामग्री को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके अलावा जेल में ही तिलक का सामान महिलाओं को उपलब्ध कराया गया था। बावजूद इसके, जानकारी के आभाव में कई महिलाएं अपने साथ खाने पीने का सामान लाई थी और उन्हें उम्मीद थी, कि वे अपने हाथों से अपने भाई को घर का बना खाना खिला पाएगी। लेकिन उनकी उम्मीद पर प्रशासन ने पानी फेर दिया। खाने पीने का सामान चेकिंग के दौरान बाहर रखवा दिया गया। जो जेल परिसर में बिखरा पड़ा देखा गया। सेंट्रल जेल में ढाई हजार से ज्यादा कैदी बंद है जिनसे मिलने के लिए करीब पांच हजार से ज्यादा महिलाएं शुक्रवार को सेंट्रल जेल पहुंची थी। चूंकि जेल का अब नया रास्ता और दरवाजा बनाया गया है। इसलिए महिलाओं को मुख्य मार्ग से अंदर तक काफी लंबी दूरी पैदल ही तय करना पड़ी। बावजूद इसके वह खाने पीने का सामान अंदर नहीं ले जा सकी। जिला प्रशासन ने मिठाई के रूप में 100 ग्राम से ज्यादा कोई भी सामग्री अंदर ले जाने की मनाही कर रखी थी। लिहाजा बिस्किट, टोस्ट और घर का खाना जेल परिसर में बिखरा पड़ा रहा। जेल प्रशासन का कहना था कि चार चरणों की सुरक्षा व्यवस्था के चलते महिलाओं को चेक किया जा रहा था। उनको आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया था। कई महिलाएं और बहनें अपना आधार कार्ड नहीं लाई थी। इसके कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। कई महिलाएं तो अपने बंदी भाई बिना मिले ही वापस लौट गई। क्योंकि उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे थे। जिनकी हालत गर्मी के कारण खराब हो रही थी। खास बात यह है कि हर साल रक्षाबंधन दीपावली की दूज और होली की दूज पर जेल प्रबंधन विशेष व्यवस्था करता है। जिसके कारण कैदी अपनी बहनों से भाई दूज के अवसर पर तिलक करवाते हैं। वहीं उन्हें इस दिन घर का बना खाना मुहैया हो जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों कि इक्का-दुक्का घटना से इस बार मिलाई में ज्यादा सख्ती बरती गई थी। इसके कारण महिलाओं को भाई दूज पर जेल आना काफी दुष्कर साबित हुआ।
