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VIDEO: लोकनायक के 121वे जन्मदिन पर मीसाबंदियों की मांग, जेपी की जीवनी को मिले पाठ्यक्रम में स्थान

 

 

ग्वालियर। लोकतंत्र सेनानी संघ के तत्वाधान में संपूर्ण क्रांति के महानायक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व महान लोकतंत्र सेनानी स्व. श्री जयप्रकाश नारायण जी का 121 वा जन्मदिन आज यहां वीरांगना लक्ष्मी बाई की प्रतिमा पर धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मिष्ठान वितरण भी किया गया।

संगठन के राष्ट्रीय सचिव मदन बाथम ने लोकनायक जयप्रकाश के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लाला टोला "सिताबदियारा" में 11 अक्टूबर 1902 में चित्रगुप्तवंशी कायस्थ परिवार में उनका जन्म हुआ व प्रभावती के साथ उनका विवाह अक्टूबर 1920 में हुआ। सिताबदियारा गांव बलिया, आरा और छपरा तीन जिलों में विस्तारित है।

उन्होंने बताया कि १९२९ में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। 1932 में गांधी, नेहरु और अन्य महत्त्वपूर्ण नेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होंने भारत में अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया। अन्ततः उन्हें भी मद्रास में सितम्बर 1932 में गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक के जेल में भेज दिया गया। जब कांग्रेस ने 1934 में चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया तो जे॰ पी॰ने इसका विरोध किया था।

1939 में उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आन्दोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाये। टाटा स्टील कम्पनी में हड़ताल कराके यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुँचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गयी। जेल से छूटने के बाद उन्होंने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। आयोजन के आरंभ में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार तथा वयोवृद्ध लोकतंत्र सेनानी जगदीश तोमर ने लोकनायक के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया।

जेपी की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल की जाये ..

राष्ट्रीय सचिव मदन बाथम ने जेपी की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की माँग करते हुए लोकतंत्र सेनानियों को आयुष्मान योजना में शामिल करने तथा दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों की पत्नी को पूर्ण पेंशन (सम्मान निधि) दिये जाने की पुरजोर माँग की।

मुलायम सिंह को श्रद्धांजलि ..

आपातकाल में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना करने के लिए संघर्ष करनेवाले उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, लोकतंत्र सेनानी श्री मुलायम सिंह यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। मुलायम सिंह के कार्यकाल में, देश में उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान एवं सम्मान निधि देने का निर्णय हुआ तथा उन्होंने इन सुविधाओं के लिये "उत्तरप्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम" बनाकर लोकतंत्र सेनानियों को सुरक्षा प्रदान की।

आयोजन की अध्यक्षता कर रहे संगठन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन विटवेकर ने कहा कि जेपी इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता। 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जिसके अन्तर्गत जे॰ पी॰ सहित 1लाख 10 हजार 806 से भी अधिक विरोधी नेताओं को MISA/DIR में बन्दी बनाया गया। 1977 में जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।

ज्ञातव्य हो कि जेपी को 1965 में लोकसेवा के लिये 'रमन मैग्सेसे पुरस्कार' तथा मरणोपरांत वर्ष 1999 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।जिलाध्यक्ष गुलशन गोगिया ने स्वागत भाषण, राजेन्द्र आर्य ने संचालन, गोपाल गांगिल ने आभार व्यक्त किया. एडवोकेट जीपी गर्ग, जयेन्द्र पाल खुराना, रामबाबू सेन, पुनीत सक्सेना, जयप्रकाश गिरी, पातीराम आर्य, बसंत शर्मा, बृजमोहन श्रीवास्तव, सुरेशचन्द्र चौरसिया आदि ने भी संबोधित किया।



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