ताज़ा ख़बर ग्वालियर : डॉ. हरिसिंह यादव बने मप्र पुलिस सेवा निवृत्त राजपत्रित अधिकारी संघ के संयोजक, अशोक भदौरिया कार्यकारी संयोजक   |  ग्वालियर : स्कूली छात्रों ने किया रामदास घाटी पार्क में पौधरोपण   |  ग्वालियर : प्रसिद्ध समाजसेवी सोनू रजक कांग्रेस में शामिल, राहुल गांधी और प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की विचारधारा से प्रेरित होकर लिया निर्णय   |  जीवन मे हमेशा याद रखे नाम, नमक और निशान का मंत्र - कर्नल अमन सिंह   |  ग्वालियर : स्वतंत्रता दिवस समारोह 15 अगस्त को उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा, आयोजन की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश, अंतरविभागीय समन्वय समिति की बैठक सम्पन्न   |  हर घर तिरंगा अभियान : तिरंगामय हुआ शहर का हृदय स्थल महाराज बाड़ा, वंदे मातरम् व देशभक्ति के नारों का जयघोष करते हुए निकली तिरंगा यात्रा   |  ग्वालियर : गोल पहाड़िया-तिघरा रोड का मंत्री श्री कुशवाह ने लिया जायजा, सड़क धंसने वाले स्थानों को चिन्हित कर सुरक्षा एवं सुधार कार्य कराने के दिए निर्देश   |  साइबर जालसाजों से सावधान रहें, बिल भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से करें -ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर   |  ग्वालियर : सावन की रिमझिम में सुरों ने रचा संगीत का मनोहारी संसार, रागायन में ध्रुपद, बेला और खयाल की त्रिवेणी ने श्रोताओं को किया रससिक्त   |  ग्वालियर : छात्र नेता हरी सिंह -दर्शन सिंह के शहीद दिवस पर आयोजित हुए कार्यक्रम, छात्रों ने निकाला मशाल जुलूस और आयोजित की श्रद्धांजलि सभा   |  

ग्वालियर में है मां वाग्देवी की प्रतिमा की प्रतिकृति

ग्वालियर। शहर के एक स्टूडियो में पिछले 15 सालों से बंद है मां वाग्देवी की एक बेहद खास प्रतिमा ! 400 से 450 किलो वजन की इस प्रतिमा को 25 शिल्पकारों ने आकार दिया था। लेकिन सालों से यह मूर्ति अपने सही स्थान पर पहुंचने का इंतजार कर रही है। दरअसल बात साल 2011 की है। धार के एक श्रद्धालु नवल किशोर ने ग्वालियर के मशहूर मूर्तिकार प्रभात राय के स्टूडियो में मां वाग्देवी (सरस्वती) की मनमोहक कृति का निर्माण कराया था। तब मकसद था इसे धार की ऐतिहासिक भोजशाला में स्थापित करना। लेकिन जब इस मूर्ति को धार ले जाया जा रहा था, तभी सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर स्थानीय पुलिस ने इसे रास्ते में ही जब्त कर लिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो पुलिस प्रशासन ने प्रतिमा को वापस मूर्तिकार प्रभात राय की ही कस्टडी (सुपुर्दगी) में सौंप दिया था। मूर्तिकार प्रभात राय का निधन हो चुका है, अब उनके सुपुत्र अनुज राय स्टूडियो संभालते हैं।मूर्तिकार अनुज राय बताते हैं कि यह मूर्ति पूरी तरह से पीतल की बनी है, जिसका वजन 400 से 450 किलो है और इस मूर्ति का आकार 25 कुशल शिल्पकारों ने दिया था। वर्ष 2011 से आज तक यह मूर्ति इसी स्टूडियो में सुरक्षित रखी है। वहीं दूसरी ओर लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल वाग्देवी प्रतिमा को कानूनी तरीकों से भारत वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में कहा जा रहा है अगर मूर्ति को लाने में दिक्कत आती है तो ग्वालियर में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिकृति को धार में स्थापित किया जा सकता है। हालंकि इस पर अंतिम निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा। सोर्स, बाइट - अनुज राय, मूर्तिकार


Fatal error: Uncaught ArgumentCountError: trim() expects at least 1 argument, 0 given in /home/webhutor/seedhasamwad.com/include/sidebar.php:33 Stack trace: #0 /home/webhutor/seedhasamwad.com/include/sidebar.php(33): trim() #1 /home/webhutor/seedhasamwad.com/details.php(67): include('/home/webhutor/...') #2 {main} thrown in /home/webhutor/seedhasamwad.com/include/sidebar.php on line 33