ग्वालियर में है मां वाग्देवी की प्रतिमा की प्रतिकृति
ग्वालियर। शहर के एक स्टूडियो में पिछले 15 सालों से बंद है मां वाग्देवी की एक बेहद खास प्रतिमा ! 400 से 450 किलो वजन की इस प्रतिमा को 25 शिल्पकारों ने आकार दिया था। लेकिन सालों से यह मूर्ति अपने सही स्थान पर पहुंचने का इंतजार कर रही है।
दरअसल बात साल 2011 की है। धार के एक श्रद्धालु नवल किशोर ने ग्वालियर के मशहूर मूर्तिकार प्रभात राय के स्टूडियो में मां वाग्देवी (सरस्वती) की मनमोहक कृति का निर्माण कराया था। तब मकसद था इसे धार की ऐतिहासिक भोजशाला में स्थापित करना। लेकिन जब इस मूर्ति को धार ले जाया जा रहा था, तभी सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर स्थानीय पुलिस ने इसे रास्ते में ही जब्त कर लिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो पुलिस प्रशासन ने प्रतिमा को वापस मूर्तिकार प्रभात राय की ही कस्टडी (सुपुर्दगी) में सौंप दिया था। मूर्तिकार प्रभात राय का निधन हो चुका है, अब उनके सुपुत्र अनुज राय स्टूडियो संभालते हैं।मूर्तिकार अनुज राय बताते हैं कि यह मूर्ति पूरी तरह से पीतल की बनी है, जिसका वजन 400 से 450 किलो है और इस मूर्ति का आकार 25 कुशल शिल्पकारों ने दिया था। वर्ष 2011 से आज तक यह मूर्ति इसी स्टूडियो में सुरक्षित रखी है। वहीं दूसरी ओर लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल वाग्देवी प्रतिमा को कानूनी तरीकों से भारत वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में कहा जा रहा है अगर मूर्ति को लाने में दिक्कत आती है तो ग्वालियर में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिकृति को धार में स्थापित किया जा सकता है। हालंकि इस पर अंतिम निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा।
सोर्स, बाइट - अनुज राय, मूर्तिकार
